Ek Rupay

ईंट-एक रुपया रीत

महाराजा अग्रसेन को समाजवाद का अग्रदूत कहा जाता है। अपने क्षेत्र
में सच्चे समाजवाद की स्थापना हेतु उन्होंने नियम बनाया कि उनके
नगर में बाहर से आकर बसने वाले प्रत्येक परिवार की सहायता के लिए
नगर का प्रत्येक परिवार उसे एक तत्कालीन प्रचलन का सिक्का व एक
ईंट देगा, जिससे आसानी से नवागन्तुक परिवार स्वयं के लिए
निवास स्थान व व्यापार का प्रबंध कर सके।

महाराजा अग्रसेन ने तंत्रीय शासन प्रणाली के प्रतिकार में एक नयी व्यवस्था को जन्म दिया, उन्होंने पुनः वैदिक
सनातन आर्य सस्कृंति की मूल मान्यताओं को लागू कर राज्य की पुनर्गठन में कृषि-व्यापार, उद्योग, गौपालन
के विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की पुनः प्रतिष्ठा का बीड़ा उठाया।
इस तरह महाराज अग्रसेन के राजकाल में अग्रोदय गणराज्य ने दिन दूनी- रात चौगुनी तरक्की की। कहते हैं कि
इसकी चरम स्मृद्धि के समय वहां लाखों व्यापारी रहा करते थे। वहां आने वाले नवागत परिवार को राज्य में
बसने वाले परिवार सहायता के तौर पर एक रुपया और एक ईंट भेंट करते थे, इस तरह उस नवागत को लाखों
रुपये और ईंटें अपने को स्थापित करने हेतु प्राप्त हो जाती थीं जिससे वह चिंता रहित हो अपना व्यापार शुरु कर
लेता था।