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अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन सम्पूर्ण विश्व में महाराजा अग्रसेन के गौरवशाली इतिहास का प्रचार प्रसार करने एवं समस्त अग्रबंधुओं का एक संगठन खड़ा करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की स्थापना 1975 में की गई। सीकर, राजस्थान से श्री श्रीकृष्ण मोदी को सम्मेलन का संस्थापक अध्यक्ष एवं दिल्ली से श्री रामेश्वर दास गुप्ता को संस्थापक महांमत्री बनाया गया। इसके संस्थापक सदस्यों में जबलपुर से श्री बद्री प्रसाद अग्रवाल, इन्दौर से डा. श्रीमती स्वराजमणि अग्रवाल, नागपुर से श्री हरिकिशन अग्रवाल,चेन्नई से श्री बृजलाल चौधरी, मुम्बई से श्री तिलकराज अग्रवाल, मैसूर से श्री बद्री प्रसाद, हैदराबाद से श्री चुन्नीलाल अग्रवाल, मेरठ से श्री बशेशर दयाल गुप्ता एवं दिल्ली से श्री जयप्रकाश भारती सम्मिलित थे। अपनी स्थापना के समय से ही इस संस्था में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व दिया गया जिससे यह अपने नाम के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक ढांचा विकसित कर सके। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बनारसी दास गुप्ता के प्रधान एवं श्री रामेश्वरदास गुप्ता के महामंत्रित्व काल में संस्था ने न केवल पूरे देश में लोकप्रियता हासिल की वरन अनेक दूसरी संस्थाओं का भी गठन किया जो आज अत्यंत सराहनीय कार्य कर रही हैं। सम्मेलन की प्रेरणा एवं प्रयासों से ही 1976 में अग्रोहा विकास ट्रस्ट का गठन किया गया जिसके माध्यम से अग्रोहा धाम का स्वरूप निखर कर सामने आया एवं पूरे देश के अग्रबंधुओं के मन मे अग्रोहा धाम की यात्रा करने की प्रेरणा उत्पन्न हुई जो दिन प्रतिदिन निंरतर आगे बढ़ती जा रही है।सम्मेलन द्वारा अग्रवाल समाज की शक्ति एवं विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए 1982 में अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन की स्थापना की गई जो आज पूरे देश में अग्रवाल एवं वैश्य समाज को संगठित करने का काम कर रहा है।अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की प्रेरणा एवं प्रयासों से ही 1987 में अग्रोहा मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए अलग संस्था का गठन किया जिसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में चलाया जाने वाला एशिया का सबसे विशाल मेडिकल कालेज एवं अस्पताल का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। आज यह तीनों संस्थाएं स्वतंत्ररूप से सराहनीय कार्य कर रही है जो अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। पिछले 42 वर्षों के इतिहास में अनेक महानुभावों को इस संस्था का नेतृत्व करने का अवसर मिला एवं सभी ने इस की लोकप्रियता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस में सर्व श्री विजय चौधरी, प्रदीप मित्तल एवं सुरेन्द्र गुप्ता सम्मिलित हैं। वर्तमान समय में श्री गोपाल शरण गर्ग के हाथों मे इस गौरवशाली संस्था का नेतृत्व है जो इस की सदस्य संख्या एंव संगठनात्मक ढांचा बढ़ाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। पिछले 42 वर्षों के दौरान सम्मेलन की उपलब्धियों को निम्नलिखित बिन्दुओं में अंकित किया जा सकता है।
महाराजा अग्रसेन पर डाक टिकट एवं फिल्म का निमार्ण
सम्मेलन के प्रयासों से भारत सरकार द्वारा 24 सितम्बर 1976 को महाराजा अग्रसेन पर डाक टिकट जारी किया गया। इस के साथ ही भारत सरकार के फिल्म डिविजन द्वारा महाराजा अग्रसेन के जीवन एवं इतिहास पर आधारित डाक्यू मेंट्री फिल्म भी बनाई गई जिसका प्रसारण विभिन्न अवसरों पर किया गया।
महाराजा अग्रसेन जयंती आयोजनों को लोकप्रिय बनाना
आज से 42 वर्ष पूर्वतक महाराजा अग्रसेन एवं उग्रसेन में अधिकांश को कोई अंतर भी नहीं पता था, दोनो को एक ही मानते थे।महाराजा अग्रसेन जयंती का आयोजन इक्का दुक्का स्थानों पर ही होता था।लेकिन सम्मेलन के प्रयासों से आज सम्पूर्ण देश में विभिन्न शहरों-कसबों में आज महाराजा अग्रसेन जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जार ही है।महाराजा अग्रसेन के नाम पर हजारों संस्थाएं देश में काम कर रही हैं जिनके द्वारा भी महाराजा अग्रसेन जयंती मनाई जा रही है।इन आयोजनों के माध्यम से न केवल अग्र-बन्धुओं में वरन समस्त देशवासियों को महाराजा अग्रसेन के जीवन एवं आदर्शों के बारे मे जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है। परिणाम यह है कि आज शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसे महाराजा अग्रसेन का नाम एंव उनके इतिहास का पतान हो।सम्मेलन के प्रयासों से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के आवासों पर भी महाराजा अग्रसेन जयंती मनाने की परंपरा प्रारम्भ हो चुकी है।अब तो आलम यह है कि बडे-बड़े स्टेडियमों में लाखों लोगों की उपस्थिति में महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है और देश मे लगभग 50 हजार स्थानों पर महाराजा अग्रसेन जयंती मनने लगी है। और यह उत्सव एक दिन न ही बल्कि पूरे सप्ताह, पखवाड़ा एवं कई स्थानों पर तो महीने भर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
महाराजा अग्रसेन पाठ्यक्रमों में शामिल सम्मेलन द्वारा किए गए सतत्प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश के कुछ राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रमों में महाराजा अग्रसेन पर पाठ कि सीन किसी स्वरूप में अवश्य सम्मिलित है।इसके माध्यम से महाराजा अग्रसेन के जीवन के बारे में जानने को अवसर विद्याख्रथयों को प्राप्त हो रहा है एवं महाराजा अग्रसेन का नाम उनके मन मस्तिष्क पर हमेशा के लिए अंकित हो जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 10 का नामकरण सम्मेलन के प्रयासों से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 (वर्तमान में संख्या 9) का नामकरण महाराजा सगरसेन जी के नाम पर रखा गया है जो दिल्ली से अग्रोहा होते हुए पाकिस्तान सीमा तक जाता है।सम्मेलन की प्रेरणा एवं प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश के प्रत्येक शहर एवं कस्बे में महाराजा अग्रसेन भवन, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज एवं महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय का नाम देखने एवं सुनने में मिल रहा है।
समुद्री जहाज का नामकरण
भारत सरकार द्वारा एक विशाल मालवाहक जहाज (जिसकी लागत लगभग 350 करोड़ रूपये है) दक्षिण कोरिया से खरीदा गया।सम्मेलन के प्रयासों से इस समुद्री जहाज कानाम महाराजा अग्रसेन के नाम पर रखा गया।इस जहाज का उपयोग आज भी खाड़ी देशों से तेल लाने में किया जाता है।सम्मेलन के तत्कालीन अध्यक्ष श्री बनारसीदास गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल उस समारोह में शामिल हुआ जिसमे इस जहाज का नामकरण किया गया एवं दक्षिण कोरिया सरकार द्वारा इसे भारत सरकार को सुपुर्द किया गया।यह जलपोत आज भी पूरी दुनिया में जहाँ भी जाता है महाराजा अग्रसेन के नाम व् उनके आदर्शों का प्रचार-प्रसार करता है।
वैवाहिक परिचय सम्मेलन एवं सामूहिक विवाह
सम्मेलन द्वारा अग्रवाल युवक-युवतियों का परिचय सम्मेलन एवं सामूहिक विवाह आयोजित करने की परम्परा प्रारम्भ की गई जो आज पूरे देश में बहुत ही लोकप्रिय है। आज निरन्तर अनेक स्थानों पर परिचय सम्मेलन एवं सामूहिक विवाह आयोजित किए जा रहे है जिससे उपयुक्त वर-वधू तलाश करने में लोगों को काफी सुविधा मिल रही है। जहाँ तक सामूहिक विवाह का प्रश्न है उसका आयोजन अग्रवाल समाज द्वारा किया जाता है लेकिन उसका लाभ समाज के सभी वर्ग के युवक-युवतियों को अपना विवाह करवाने में मिल रहा है जिसकी जितनी भी प्रसंशा की जाए कम होगी।सम्मेलन द्वारा विवाह में होने वाली फिजूल खर्चों को रोकने के लिए भी जागरूकता लाने का प्रयास निरन्तर किया जा रहा है जिसके परिणाम भी दिखाई देने लगे है। अग्रोहा शक्तिपीठ, अग्रोहा में भी युवक युवतियों का विवाह निःशुल्क आयोजित करने की व्यवस्था की गई है।.